नंद भवन को भूषण माई ।

यशुदा को लाल, वीर हलधर को, राधारमण सदा सुखदाई ॥

इंद्र को इंद्र, देव देवन को, ब्रह्म को ब्रह्म, महा बलदाई ।

काल को काल, ईश ईशन को, वरुण को वरुण, महा बलजाई ॥

शिव को धन, संतन को सरबस, महिमा वेद पुराणन गाई ।

‘नंददास’ को जीवन गिरिधर, गोकुल मंडन कुंवर कन्हाई ॥