मंगल आरती गोपाल की ।

नित प्रति मंगल होत निरख मुख, चितवन नयन विशाल की ॥

मंगल रूप श्याम सुंदर को, मंगल छवि भृकुटि सुभाल की ।

चतुर्भुज प्रभु सदा मंगल निधि बानिक गिरिधर लाल की ॥