सुन री सखी तेरो दोष नही,मेरो पिय रसिया री ।
नवल लाल को सबक कोहू चाहत, कौन कौन के मन बसिया री ॥
एकन सो नयना जोरें एकन सों द्रोह मरोरें,एकन सों मुख हँसिया री ।
कृष्णजीवन लखीराम के प्रभु माई संग जोरत पूरन रखिया री ॥