लालन जागों हों भयो भोर ।
दूध दही पकवान मिठाई, लीजे माखन रोटी बोर ॥१॥
विकसे कमल विमल बानी सब, बोलन लागे पंछी चहुं ओर ।
रसिक प्रितम सों कहत नंदरानी, उठ बैठो तुम नंद किशोर ॥२॥

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