महामहोत्सव श्री गोकुल गाम ।
प्रेम मुदित युवती जस गावत श्याम सुन्दर को ले ले नाम ॥
जहाँ तहाँ लीला अवगाहत खरिक खोर दधि मंथन ठाम ।
करत कुलाहल निस और वासर आंनंद में बीतत सब याम ॥
नंद गोप सुत सब सुख दायक मोहन मूरति पूरन काम ।
‘चतुर्भुज’ प्रभु गिरधर आनंद मेरे सखि स्वरूप सोभा अभिराम ॥