जागिये ब्रजराज कुँवर, कमल कुसुम फूले ।
कुमुद वृन्द सकुचित भये,भृंग लता भूले ॥१॥
तमचर खग रोर सुनहु, बोलत बनराई ।
राँभति गो खरिकन में, बछरा हित धाई ॥
बिधु मालिनी रवि प्रकास, गावत नर नारी ।
सूर श्याम प्रात उठो, अम्बुज कर धारी ॥