चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो ।
भक्त के वश कृपा करत हें सर्वदा ऐसो श्री यमुना जी को हे जु साखो ॥१॥

जा मुख ते श्री यमुने यह नाम आवे, संग कीजे अब जाय ताको ।
चतुर्भुज दास अब कहत हैं सबन सों, तातें श्री यमुने यमुने जु भाखो ॥२॥

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