मृगनैनी नार नवल रसिया ।
जाके बडे बडे नैन में कजरा सोहे जाकी टेढी सी नजर मेरे मन बसिया ॥
जाके नवरंगी तो लहंगा सोहिये जाकि पतरी कमर मेरे मन बसिया ॥
पुरुषोत्तम प्रभु की छभि निरखत सबे मिली ब्रज में बसिया ॥