फागुन में रसिया घर बारी फागुन में ।
हो हो बोले गलियन डोले गारी दे दे मत वारी ॥
लाजधरी छपरन के ऊपर आप भये हैं अधिकारी ॥
पुरुषोत्तम प्रभु की छबि निरखत ग्वाल करे सब किलकारी ॥