श्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर आज सखी तृण टूटे री ।
चोवा चंदन अबीर कुंकुमा पिचकाइन रंग छूटे री ॥१॥

लाल के नैना रगमगे देखियत अंग अनंगन लूटे री ।
कृष्णदास धन्य धन्य राधिका अधर सुधा रस लूटे री ॥२॥