श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई ।
पूरण ब्रह्म प्रकटे पुरुषोत्तम श्री वल्लभ सुखदाई ॥१॥
नाचत वृद्ध तरुण और बालक, उर आनंद न समाई ।
जयजय यश बंदीजन बोलत विप्रन वेद पढाई ॥२॥
हरद दूब अक्षत दधि कुंकुम आंगन कीच मचाई ।
वंदन माला मालिन बांधत मोतिन चोक पुराई ॥३॥
फूले द्विजवर दान देत हें पट भूषण पहराई।
मिट गये द्वंद नंददासन के मन वांछित फल पाई ॥४॥

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