भरोसो वल्लभ ही को राखो।
सगरे काज सरेंगे छिन में, इन ही के गुन भाखो ॥१॥

निस दिन संग करो भक्तन को, असमर्पित नही चाखो।
वल्लभ श्री वल्लभ पद रज बिन और तत्व सब नाखो ॥२॥