श्री वल्लभ प्रभु करुणा सागर जगत उजागर गाइये ।
निरख निरख मंगल मुख की छबि बलि बलि बलि बलि जाइये ॥१॥
जिनकी कृपा अनुग्रह तें श्री गिरिधर लाड लडाइये।
अनायास सब सुख को लहिये जीवन को फल पाइये ॥२॥
चरण परस तन रूप परस सब ही दुख दूर बहाइये।
श्री वल्लभ गुन गाइये याते रसिक कहाइये॥३॥