श्री वल्लभ प्रभु करुणा सागर, जगत उजागर गाइये।
श्री वल्लभ के चरण कमल की, बलि बलि बलि बलि जाइये॥१॥

वल्लभ सृष्टि समाज संग मिल, जीवन को फल पाइये ।
श्री वल्लभ गुण गाइये, जा हि ते रसिक कहाइये॥२॥