आज जगती पर जयजय जार।

प्रगट भये श्री वल्लभ पुरुषोत्तम बदन अग्नि अवतार॥१॥

धन्य दिन माधव मास एकादसी कृष्ण पच्छ रविवार।

श्री मुख वाक्य कलेवर सुन्दर धर्यो जगमोहन मार॥२॥

श्री भगवत आत्म-अंग जिनके प्रगट करन विस्तार।

दुंदुभी देव बजावत गावत सुर-वधू मंगल चार॥३॥

पुष्टि प्रकास करेंगे भू पर जनहित जग अवतार।

आनंद उमग्यो लोक तिहूंपुर जन ’गिरिधर’ बलिहार॥२॥