वल्लभ भूतल प्रगट भये।
माधव मास कृष्ण एकादशी पूरन विधु उदये॥१॥

पुत्र जन्म सुन श्री लछमन भट बहु विधि दान दिये।
मागध सूत बंदीजन बोलत सब दुःख दूर गये॥२॥

पुष्टि प्रकास करन को आये द्विज स्वरूप धरये।
विष्णुदास के सिर बिराजत प्रभु आनंदमये॥३॥