अधम उद्धारनी मैं जानी, श्री जमुना जी।
गोधन संग स्यामघन सुन्दर तीर त्रिभंगी दानी॥१॥

गंगा चरन परस तें पावन हर सिर चिकुर समानी।
सात समुद्र भेद जम-भगिनी हरि नखसिख लपटानी॥२॥

रास रसिकमनि नृत्य परायन प्रेम पुंज ठकुरानी ।
आलिंगन चुंबन रस बिलसत कृष्ण पुलिन रजधानी ॥३॥

ग्रीष्म ऋतु सुख देति नाथ कों संग राधिका रानी।
गोविन्द प्रभु रवि तनया प्यारी भक्ति मुक्ति की खानी ॥४॥