मनडो म्हारो लाग्यो गुरु चरणनन में। अब नही लागत औरन में।

लख चौरासी भटकत आयो, गुरु की कृपा बिन अति दुख पायो,

फिर फिर हार्यो चौरासिन में।  मनडो म्हारो लाग्यो गुरु चरणनन में।

प्रकट स्वरूप परम प्रभु आया, जनहित कारण आप पधार्या

भव बन्धन से छुडावन में । मनडो म्हारो लाग्यो गुरु चरणनन में।

धन्य म्हारा भाग्य पुष्टिमार्ग बताया, जन्म जनम का फन्द छुडाया,

लगन लगी हरि चरननन में । मनडो म्हारो लाग्यो गुरु चरणनन में।

गुरु महिमा का कोई पार न पावे, सकल वेद अरु शास्त्र बतावे

गुरु बिन श्याम मिले ना जग में। मनडो म्हारो लाग्यो गुरु चरणनन में।

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