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रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये।
विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥१॥

लै कर बीन बजाय गाय पिय प्यारी जेंमत रुचि उपजैये।
कृष्णदास वृषभानु सुता संग घूमर दै दै नंदनंद रिझैये॥२॥

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तीज गनगौर त्यौहार को जानि दिन करत भोजन लाल लाडिली पिय साथ।
चतुर चंद्रावलि बैठि गिरिधरन संग देति नई नई सोंज ले ले अपने हाथ॥१॥

छबि बरनी न जात दोऊ रुचि सों खात करत हसि हसि बात उमग भरि भरि बाथ।
उपजी अंतर प्रीति मदनमोहन कुंज जीत पीवत पय सद्य प्रभु कृष्णदासानि नाथ॥२॥

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